सभी रंग घुल जाएँ ऐसे


 

सराबोर कर दो

 हर मन को

अगली होली यार

सभी रंग घुल जाएँ ऐसे

 एक धरा हो

एक पृष्ठ हो

एक हमारे मन की आँखें

 धर्म जाति व्यव्हार एक हो

गुल गुलशन सब खिले मिलेंगे

 -अब उस होली त्यौहार

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५ 

 27.03.2011

Advertisements

About surendrashuklabhramar5

माँ सरोज ने कमल खिलाया , शिव ने आशीर्वाद दिया ,मधुर -मधुर कवितायेँ रच के -खुश्बू हम फ़ैलाने आये -सदा सत्य की विजय धरा हो - यही आप से मांग रहे हम -अपना प्यारा साथ हमें दो -'दर्द' और 'दर्पण' को मेरे -अपना योगदान कुछ दे दो -कुछ लिख कर के -कुछ पढ़ कर के -अँधियारा अब दूर भगाओ सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५ प्रतापगढ़ उ.प्र.
This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

One Response to सभी रंग घुल जाएँ ऐसे

  1. padhariye hindi blog jagat me aapka swagat hai होली आई रे -२ , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s